गौरतलब है कि आज के समय में अफवाहें भी कोरोना वायरस से कम खतरनाक नहीं साबित हो रही है. वेबसाइट स्टेटिस्ट के अनुसार, 2020 तक भारत में लगभग सत्तर करोड़ लोग कंप्यूटर या मोबाइल के माध्यम से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे. अनुमान है कि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 97.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी दुनिया में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले सबसे ज्यादा लोग चीन के बाद भारत में ही हैं. भारत में व्हाट्सऐप के 53 करोड़ फेसबुक के 40 करोड़ और ट्विटर के एक करोड़ से अधिक यूजर्स हैं. देश में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों की भारी संख्या है, इसलिए अफवाहों के फैलने की संभावना भी भरपूर है. वैसे, सोशल सर्वे एजेंसियां लगातार भारत में फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स और फैक न्यूज के मुद्दे पर टेलीकॉम रेगुलेटर्स और सूचना-प्रसारण मंत्रालय को चेतावनी देती रही है. ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' को एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ समय पहले फेसबुक ने भारत में फर्जी अकाउंट्स को हटाने की भी एक योजना तैयार की थी, लेकिन किसी वजह से यह योजना सफल न हो सकी.
उल्लेखनीय है कि आज कोरोना की दूसरी लहर वजह से देश में स्वास्थ्य पर बढ़ते दबाव के कारण अस्पतालों के भीतर बेड मिलना बड़ा मुश्किल हो रहा है. एक ओर जहां जरूरी दवाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं, तो दूसरी ओर प्लाज्मा के लिए भी लोग परेशान होते दिख रहे हैं. ऐसे में मरीजों के परिजनों के .लिए सोशल मीडिया पर मदद मांगने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता है. लिहाजा फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मदद मांगी जा रही है, मदद मिल भी रही है और सोशल मीडिया पर मददगारों का समूह तेजी से सक्रिय भी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सोशल मीडिया अब कोरोना की लड़ाई में और अहम भूमिका के साथ आगे आएगा.
हालांकि, हमें ध्यान रखना चाहिए कि सोशल मीडिया के जरिये ही जाल में फंसा कर ठगी करने वाले लोगों की बातें भी बहुत सामने आ रही है. साइबर अपराधी ऑनलाइन प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप आदि पर आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए जीवन रक्षक औषधी, वैक्सीन व ऑक्सीजन एवं अन्य चिकित्सीय संसाधनों की उपलब्धता दशांकर लिंक भेज रहे हैं. हाल में सरकार का अट्ठारह से अधिक उम्र के लिए बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन का फैसला सामने आते ही साइबर अपराधी नई तकनीक के साथ ऑनलाइन फ्रॉड के लिए सक्रिय हो गए हैं.
वैक्सीनेशन के नाम पर साइबर अपराधियों ने बड़ी हो चालाकी के साथ हूबहू वेबसाइट पेज भी तैयार किया है और संबंधित पेज का लिंक साइबर अपराधी खुद लोगों के बीच पहुंचा रहे है. वैक्सीन के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए साइबर ठग वॉट्सऐप मैसेज और ईमेल पर लिंक भी भेज रहे हैं. लिंक में रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरवाते हैं, फिर ओटीपी डालते ही अकाउंट में सेंध लगनी शुरू हो जाती है.
साइबर अपराधी फिशिंग और विशिंग दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा लिंक के जरिए रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन टूल के मालवेयर भी भेज रहे हैं. इसी टूल के जरिए मोबाइल को हैक किया जा रहा है. नतीजन, खासतौर पर इस समय हमें सोशल मीडिया पर ऐसी खबरों को पोस्ट करने या मैसेज के माध्यम से खबर को आगे बढ़ाने से बचना चाहिए, जो अफवाहों को तूल देती हों. हमें तब तक किसी सूचना को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, जब तक कि यह पूरी तरह से यह प्रमाणित न हो जाए कि अमुक खबर सही है.
लिहाजा, वर्तमान कोविड परिस्थिति बहुत भयावह बन चुकी है, इसीलिए गैर सरकारी संगठन, केंद्र सरकार और राज्य सरकारें सभी मिलकर कार्य कर रही हैं. ऐसे में समाज का भी दायित्व बनता है कि इस युद्ध से निपटने बाबत सरकार का साथ दें और किसी प्रकार से सरकार के प्रयास में बाधा न बनें.
(लेखक- लालजी जयसवाल)

